
फरवरी 2026 की शुरुआत में भारतीय वायुसेना के एक अड्डे पर प्रशिक्षण उड़ान के बाद लैंडिंग के दौरान एक हल्का लड़ाकू विमान तेजस दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
यह जानकारी The Economic Times ने रक्षा क्षेत्र से जुड़े अपने सूत्रों के हवाले से प्रकाशित की।
पायलट ने सफलतापूर्वक इजेक्ट किया और उसे गंभीर चोट नहीं आई। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार विमान को संरचनात्मक रूप से भारी क्षति पहुंची है और संभवतः उसे सेवा से बाहर कर दिया जाएगा।
भारतीय वायुसेना ने औपचारिक जांच और पूरे बेड़े की तकनीकी निरीक्षण प्रक्रिया शुरू कर दी है।
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वर्तमान में भारत के पास तेजस Mk-1 के लगभग 32 विमान संचालन में हैं। यह दुर्घटना LCA (Light Combat Aircraft) के एकल-सीट संस्करण से संबंधित है।
यह अपेक्षाकृत छोटे बेड़े में दर्ज तीसरी क्षति है, जिससे कार्यक्रम पर दबाव बढ़ गया है।
हालिया घटनाओं का इतिहास

यह नई दुर्घटना दो अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं के बाद सामने आई है:
12 मार्च 2024 को जैसलमेर के पास प्रशिक्षण उड़ान के दौरान एक तेजस विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था; उस समय भी पायलट ने सफलतापूर्वक इजेक्ट किया था।
21 नवंबर 2025 को दुबई एयर शो के दौरान एक प्रदर्शन उड़ान में तेजस विमान कम ऊंचाई पर अनियंत्रित गोता लगाने के बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में पायलट की मृत्यु हो गई और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विमान की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठे।
दुबई की दुर्घटना का विशेष रूप से निर्यात छवि पर सीधा प्रभाव पड़ा।
रिपोर्ट में संरचनात्मक कमियों का उल्लेख
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ऑडिट रिपोर्ट में Mark-I संस्करण में 53 महत्वपूर्ण कमियां पाई गईं, जो सीधे परिचालन क्षमता को प्रभावित करती हैं। प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
- अधिक वजन और सीमित थ्रस्ट, जिससे गति और गतिशीलता प्रभावित होती है।
- कॉकपिट और ईंधन प्रणाली की अपर्याप्त सुरक्षा।
- आंतरिक सीमाएं, जिनके कारण आत्मरक्षा प्रणालियों की पूर्ण स्थापना संभव नहीं हो सकी।
- स्वदेशीकरण की वास्तविक दर लगभग 35% आंकी गई, जो प्रारंभिक घोषित 70% से काफी कम है।
- विदेशी घटकों पर निर्भरता से कमजोरियां बढ़ती हैं।
विदेशी घटकों पर भारी निर्भरता एक अन्य संवेदनशील मुद्दा है। स्वदेशी कावेरी इंजन परियोजना के बंद होने के बाद कार्यक्रम General Electric के F404 और F414 इंजनों पर निर्भर हो गया।
2024 से 2025 के बीच अमेरिका में आपूर्ति श्रृंखला में देरी के कारण F404 इंजनों की डिलीवरी दो वर्षों से अधिक समय तक टल गई, जिससे उत्पादन कार्यक्रम प्रभावित हुआ।
2025 में HAL ने 83 Mk1A विमानों में इज़राइली EL/M-2052 रडार (Israel Aerospace Industries – IAI) लगाने का निर्णय लिया, जिससे स्वदेशी उत्तम रडार को प्रतिस्थापित किया गया। इस निर्णय से नई चुनौतियां सामने आईं:
सोर्स कोड का नियंत्रण इज़राइल के पास ही बना हुआ है।
भारतीय अस्त्र Mk1 मिसाइल के साथ एकीकरण में समस्याएं।
मार्च 2025 में किया गया परीक्षण रडार और हथियार प्रणाली के बीच डेटा सिंक्रोनाइज़ेशन त्रुटि के कारण विफल रहा।
रणनीतिक कार्यक्रम पर बढ़ती निगरानी
तेजस भारत की रक्षा आधुनिकीकरण और एयरोस्पेस क्षेत्र में औद्योगिक आत्मनिर्भरता रणनीति का प्रमुख हिस्सा है। हालांकि हालिया दुर्घटनाएं, उत्पादन में देरी और तकनीकी चुनौतियां तकनीकी परिपक्वता, औद्योगिक प्रबंधन और बाहरी निर्भरता को लेकर बहस को फिर से तेज कर रही हैं।
ताजा दुर्घटना की जांच यह निर्धारित करेगी कि यह परिचालन त्रुटि, मानवीय गलती या प्रणालीगत समस्या का परिणाम था — और यह निष्कर्ष सीधे उत्पादन की गति और अंतरराष्ट्रीय विश्वास को प्रभावित कर सकता है।
स्रोत और चित्र: economictimes | Wikimedia. यह सामग्री AI की सहायता से तैयार की गई और संपादकीय टीम द्वारा समीक्षा की गई।
